- धामी सरकार की पहल से संवर रहा नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास, एमडीडीए ने बढ़ाईं आधुनिक सुविधाएं
देहरादून, 10 सितंबर 2026। किसी बच्चे के लिए घर महज चार दीवारें नहीं, बल्कि सुरक्षा, अपनापन और बेहतर भविष्य की पहली सीढ़ी होता है। ऐसे बच्चे, जिन्होंने आर्थिक तंगी, पारिवारिक परिस्थितियों या माता-पिता का साया उठ जाने के कारण जीवन में कठिनाइयों का सामना किया है, उनके लिए सुरक्षित आवास और शिक्षा किसी बड़ी सौगात से कम नहीं।
इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर जरूरतमंद बच्चों के लिए तैयार किए जा रहे नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से छात्रावास को आधुनिक और सुविधाजनक बनाने के लिए सौर ऊर्जा, कूलर और सामूहिक गतिविधियों के लिए हॉल जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
छत पर 10 केवीए का सोलर प्लांट
बच्चों के आशियाने को ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत बनाने के लिए छात्रावास की छत पर 10 केवीए क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित कर दिया गया है। सौर ऊर्जा से विद्युत व्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ ही बिजली की बचत और वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल छात्रावास को भविष्य में अधिक ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कमरों में पहुंचेंगे 10 कूलर, गर्मी से मिलेगी राहत
बच्चों के आराम और सुविधा को ध्यान में रखते हुए छात्रावास के कमरों के लिए करीब 10 कूलर उपलब्ध करा दिए गए हैं। इन्हें जल्द ही कमरों में स्थापित किया जाएगा। इससे गर्मी के मौसम में बच्चों को रहने के लिए अपेक्षाकृत बेहतर और आरामदायक वातावरण मिल सकेगा।
सामूहिक गतिविधियों के लिए बनेगा नया हॉल
छात्रावास में बच्चों की सामूहिक गतिविधियों, शैक्षणिक कार्यक्रमों, बैठकों और अन्य आयोजनों के लिए नए हॉल का निर्माण प्रस्तावित है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हॉल बनने के बाद बच्चों को पढ़ाई के अलावा विभिन्न सामूहिक गतिविधियों के लिए भी बेहतर स्थान उपलब्ध हो सकेगा।
करीब 100 बच्चों को मिलेगा आवास और शिक्षा का सहारा
नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास की क्षमता करीब 100 बच्चों की होगी। यहां बच्चों के लिए रहने और भोजन सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर परिस्थितियों में जीवन बिता रहे बच्चों को सुरक्षित आवास के साथ शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराना है।
योजना के तहत 6 से 18 वर्ष तक के बच्चों को हॉस्टल सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसमें अनाथ बच्चे, जिनके एक या दोनों माता-पिता नहीं हैं, बेहद कम वार्षिक आय वाले परिवारों के बच्चे, अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चे, दिव्यांग बच्चे, कूड़ा बीनने वाले, भिक्षावृत्ति में लगे तथा शहरी वंचित वर्ग के बच्चे शामिल होंगे। विशेष देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को भी योजना के दायरे में लाने का लक्ष्य है।
सिर्फ छात्रावास नहीं, भविष्य निर्माण की पहल
सरकार की यह पहल केवल बच्चों को छत उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे उद्देश्य जरूरतमंद बच्चों को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मनिर्भर बनने का अवसर उपलब्ध कराना है।
एमडीडीए की ओर से सोलर प्लांट, कूलर और प्रस्तावित हॉल जैसी सुविधाओं का विकास इस बात को दर्शाता है कि परियोजना में केवल भवन निर्माण ही नहीं, बल्कि वहां रहने वाले बच्चों की वास्तविक जरूरतों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप प्राधिकरण विकास कार्यों के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़ी परियोजनाओं को भी प्राथमिकता दे रहा है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास में बच्चों की सुविधा के लिए 10 केवीए का सोलर प्लांट स्थापित किया गया है और कमरों के लिए कूलर उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने कहा कि करीब 100 बच्चों की क्षमता वाला यह छात्रावास जरूरतमंद बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्राधिकरण का प्रयास है कि बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिलें और वे शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकें।
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि छात्रावास में बच्चों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। सोलर प्लांट स्थापित किया जा चुका है और कमरों में कूलर लगाए जा रहे हैं। वहीं, एक हॉल के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि प्रयास है कि छात्रावास में रहने वाले बच्चों को सुरक्षित, सुविधाजनक और सकारात्मक वातावरण मिले, ताकि वे बिना किसी बाधा के पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें और भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।




