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Reading: हिमालय दिवस पर सीएम धामी की बड़ी घोषणा, हर साल मिलेगा ‘हिमालय विभूति सम्मान’
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उत्तराखंड

हिमालय दिवस पर सीएम धामी की बड़ी घोषणा, हर साल मिलेगा ‘हिमालय विभूति सम्मान’

Pahad Vaarta
Last updated: September 7, 2026 12:11 pm
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  • हिमालय परिषद की मूलभूत सुविधाओं के लिए एक करोड़ रुपये की घोषणा, बोले- इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन से निकलेगा उत्तराखंड के विकास का रास्ता

देहरादून। हिमालय दिवस के अवसर पर सोमवार को वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून में ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालय संरक्षण और सतत विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

Contents
‘इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन जरूरी’युवाओं और जनभागीदारी पर दिया जोरविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े पोस्टर किए जारीहिमालयी राज्यों की आवाज राष्ट्रीय मंच पर उठाने की जरूरत

मुख्यमंत्री ने हिमालय परिषद में मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों के विकास के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की। साथ ही हिमालय के संरक्षण, संवर्धन और सतत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और हिमालय के लिए समर्पित विशिष्ट व्यक्तित्वों को हर वर्ष ‘हिमालय विभूति सम्मान’ प्रदान करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय उत्तराखंड की केवल भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति, सभ्यता और अस्तित्व का आधार है। गंगा और यमुना समेत अनेक जीवनदायिनी नदियों का उद्गम हिमालय से होता है। जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, ग्लेशियरों पर बढ़ता दबाव, जलस्रोतों का संकट, भूस्खलन, अतिवृष्टि, वनाग्नि और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाएं हिमालयी क्षेत्रों के लिए गंभीर चुनौती बन रही हैं।

उन्होंने कहा कि हिमालय की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों में विज्ञान, तकनीक, सुरक्षा और प्रकृति के बीच संतुलन जरूरी है। उत्तराखंड को ऐसा विकास मॉडल अपनाना होगा, जिसमें सड़कें भी बनें और जंगल भी सुरक्षित रहें, रोजगार बढ़े और नदियां भी निर्मल रहें।

‘इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन जरूरी’

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है, लेकिन विकास का मॉडल उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप होना चाहिए। उत्तराखंड के विकास का रास्ता इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन से होकर ही निकलेगा।

उन्होंने कहा कि हिमालय संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है। नई पीढ़ी हमसे केवल सड़कों और इमारतों का हिसाब नहीं मांगेगी, बल्कि स्वच्छ हवा, पानी, नदियों और जंगलों का भी हिसाब मांगेगी।

युवाओं और जनभागीदारी पर दिया जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय संरक्षण को सरकारी कार्यक्रमों और सेमिनारों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे जन-जन का आंदोलन बनाना होगा। इसी उद्देश्य से 2 सितंबर के बुग्याल दिवस से 9 सितंबर के हिमालय दिवस तक पूरे सप्ताह को ‘हिमालय दिवस सप्ताह’ के रूप में मनाने की शुरुआत की गई है।

उन्होंने कहा कि बुग्याल जैव विविधता और जल स्रोतों के महत्वपूर्ण आधार हैं। जंगल हवा, पानी और मिट्टी के रक्षक हैं, जबकि नदियां हमारी सभ्यता की जीवनधारा हैं। हिमालय संरक्षण को पहाड़ की समृद्धि से जोड़ना होगा। स्थानीय उत्पादों को बाजार, मातृशक्ति को आर्थिक अवसर, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देकर पलायन को कम किया जा सकता है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े पोस्टर किए जारी

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित पांच पोस्टरों का विमोचन किया। इनमें 7वें देहरादून इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल, साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग, सीमांत बाल विज्ञान कांग्रेस, ज्ञानोत्कर्ष और 21वीं उत्तराखंड राज्य साइंस कॉन्फ्रेंस के पोस्टर शामिल रहे।

मुख्यमंत्री ने विज्ञान के लोकप्रियकरण पर केंद्रित पत्रिका ‘विज्ञान संप्रेषण’ के पांचवें वार्षिकांक का भी विमोचन किया।

हिमालयी राज्यों की आवाज राष्ट्रीय मंच पर उठाने की जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन किसी राज्य या देश की सीमा देखकर प्रभाव नहीं डालता। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में कम योगदान देने वाले हिमालयी क्षेत्रों को भी इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। ऐसे में हिमालयी राज्यों की चिंताओं और समस्याओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंचों तक मजबूती से पहुंचाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘नमामि गंगे’, ‘नेशनल मिशन फॉर सस्टेनिंग द हिमालयन इकोसिस्टम’ और ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ जैसे प्रयासों के माध्यम से हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण और सतत विकास को गति दी जा रही है। उत्तराखंड सरकार का प्रयास है कि राज्य हिमालय संरक्षण के मामले में केवल अपनी चिंता व्यक्त करने वाला प्रदेश न रहे, बल्कि पूरे देश को दिशा देने वाला मॉडल राज्य बने।

कार्यक्रम में विधायक किशोर उपाध्याय, हेस्को के संस्थापक एवं पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर, महानिदेशक यू-कॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, रजिस्ट्रार डॉ. राजेश उपाध्याय, संयुक्त निदेशक यू-कॉस्ट डीपी उनियाल सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

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