देहरादून, 3 सितंबर 2026।
प्रदेश के शहरों को सुनियोजित, सुंदर और बेहतर नागरिक सुविधाओं से लैस करने की दिशा में धामी सरकार ने विकास प्राधिकरणों की कार्यशैली को और अधिक प्रभावी बनाने की कवायद तेज कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने लंबित विकास योजनाओं को गति देने के साथ प्रत्येक कार्य की समय-सीमा और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एमडीडीए सभागार में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान सड़क सुधार, शहरों के सौंदर्यीकरण, पार्किंग, सिटी पार्क, पिंक टॉयलेट और अवैध निर्माण पर प्रभावी नियंत्रण सहित विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई और आगामी कार्ययोजना पर मंथन हुआ।
शहरों के व्यापक सौंदर्यीकरण को प्राथमिकता देते हुए एमडीडीए की ओर से 15 अक्टूबर तक विशेष अभियान चलाने की तैयारी है। इसके तहत सड़कों को दुरुस्त करने, सिटी पार्क विकसित करने और सार्वजनिक स्थलों को बेहतर स्वरूप देने के साथ महिलाओं की सुविधा के लिए पिंक टॉयलेट की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर रहेगा।
प्रमुख मार्गों, चौराहों, डिवाइडरों और सार्वजनिक स्थलों को आकर्षक बनाने के साथ हरियाली, प्रकाश व्यवस्था और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
शहर के प्रमुख क्षेत्रों का सौंदर्यीकरण G-20 आयोजन की तर्ज पर करने की योजना है। स्थानीय संस्कृति और शहर की पहचान को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक स्थलों को आधुनिक और आकर्षक स्वरूप दिया जाएगा। एमडीडीए का उद्देश्य ऐसा शहर विकसित करना है, जहां स्थानीय नागरिकों के साथ पर्यटकों को भी बेहतर सुविधाएं और सकारात्मक अनुभव मिल सके।
बढ़ते यातायात दबाव के बीच पार्किंग की समस्या को लेकर भी प्राधिकरण गंभीर है। अधिकारियों को अस्थायी व्यवस्था के बजाय पार्किंग का स्थायी और व्यावहारिक समाधान तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। उपलब्ध भूमि, वर्तमान यातायात दबाव और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
अवैध निर्माण पर लगाम कसने के लिए अब आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। एमडीडीए क्षेत्र में जीआईएस, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक के माध्यम से निर्माण गतिविधियों की निगरानी मजबूत की जाएगी। इससे अनधिकृत निर्माण की शुरुआती स्तर पर ही पहचान कर समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी।
प्राधिकरणों में जियो-इन्फॉर्मेशन आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे निर्माण गतिविधियों की निगरानी अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से हो सकेगी।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि विकास प्राधिकरणों की भूमिका केवल नक्शे पास करने या निर्माण संबंधी कार्रवाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए। शहरों के समग्र और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकास में प्राधिकरणों की सक्रिय भूमिका जरूरी है। सड़क, पार्किंग, हरियाली, सार्वजनिक सुविधाओं और नियोजित शहरी विस्तार को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रदेश के शहरों का विकास सुनियोजित और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप हो। एमडीडीए मुख्यमंत्री की अपेक्षाओं के अनुरूप पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि लंबित योजनाओं को गति देने के साथ सड़क, पार्किंग, सिटी पार्क और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। 15 अक्टूबर तक सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्यों को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। अवैध निर्माण की निगरानी के लिए ड्रोन, जीआईएस और सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में प्राधिकरण स्तर पर कार्ययोजना तैयार कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सभी लंबित कार्यों की समीक्षा कर उनकी समय-सीमा और जिम्मेदारी तय की जा रही है।
उन्होंने कहा कि सड़क सुधार, सौंदर्यीकरण, पार्किंग, सिटी पार्क और पिंक टॉयलेट जैसे कार्य प्राथमिकता में हैं। अवैध निर्माण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रयास है कि विकास योजनाओं का लाभ समय पर आम लोगों तक पहुंचे और शहरों का विकास व्यवस्थित एवं भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो।




