- चार महाविद्यालयों के संयुक्त तत्वावधान में हुआ आयोजन, विशेषज्ञों ने लैंगिक, जातिगत और ग्रामीण-शहरी डिजिटल असमानता पर रखे विचार
थत्यूड़, टिहरी गढ़वाल। डिजिटल तकनीक ने जहां शिक्षा, शोध और ज्ञान के प्रसार को नई गति दी है, वहीं समाज के विभिन्न वर्गों के बीच डिजिटल संसाधनों तक पहुंच की असमानता भी एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है। इसी विषय पर चर्चा के लिए 15 अक्टूबर 2026 को राजकीय महाविद्यालय थत्यूड़, टिहरी गढ़वाल में “भारत में तकनीकी विभाजन एवं सामाजिक असमानता” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर आदित्य कुमार मौर्य की अध्यक्षता में आयोजित इस वेबिनार का आयोजन राजकीय महाविद्यालय थत्यूड़, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डोईवाला, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जोशीमठ और राजकीय महाविद्यालय बनबसा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डोईवाला के प्राचार्य प्रोफेसर देवेश भट्ट और राजकीय महाविद्यालय बनबसा के प्राचार्य प्रोफेसर आनंद प्रताप सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। राजकीय महाविद्यालय थत्यूड़ के समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष एवं वेबिनार की आयोजक सचिव डॉ. गीता रावत शाह ने मुख्य वक्ता प्रोफेसर भगवान सिंह बिष्ट का परिचय प्रस्तुत करते हुए उनका स्वागत किया।
डिजिटल तकनीक ने ज्ञान और संसाधनों तक पहुंच बनाई आसान
मुख्य अतिथि एवं उच्च शिक्षा उन्नयन समिति, देहरादून के उपाध्यक्ष प्रोफेसर देवेंद्र सिंह भसीन ने अपने संबोधन में कहा कि डिजिटल तकनीक ने सामाजिक गतिविधियों और नीतिगत प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके माध्यम से वैश्विक स्तर पर ज्ञान और संसाधनों तक पहुंच पहले की तुलना में अधिक सुगम हुई है।
उन्होंने डिजिटल तकनीक के बढ़ते महत्व के बीच समाज के विभिन्न वर्गों तक इसके लाभ पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए संस्कार जरूरी: प्रो. बिष्ट
प्रख्यात समाजशास्त्री एवं उत्तराखंड सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रोफेसर बीएस बिष्ट ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने अनेक कार्यों को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ ही दुरुपयोग और सामाजिक नुकसान की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को संस्कारवान बनाना और उनमें जिम्मेदारी की भावना विकसित करना आवश्यक है, ताकि वे तकनीक का सकारात्मक उपयोग करें और एक स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान दे सकें।
लैंगिक और जातिगत असमानता भी डिजिटल विभाजन की वजह
बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की समाजशास्त्र की प्रोफेसर जया श्रीवास्तव ने डिजिटल विभाजन के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डिजिटल संसाधनों तक पहुंच के मामले में लैंगिक और जातिगत असमानताओं के साथ-साथ पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के बीच भी अंतर देखने को मिलता है।
उन्होंने इन असमानताओं को समझने और डिजिटल तकनीक का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
शोध कार्यों में डिजिटल तकनीक की अहम भूमिका
लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के प्रोफेसर प्रमोद कुमार गुप्ता ने शोध कार्यों में डिजिटल तकनीक के उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि डिजिटल माध्यमों के जरिए शोध प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने, सूचनाओं तक पहुंच बढ़ाने और ज्ञान के आदान-प्रदान को सुगम बनाने की व्यापक संभावनाएं हैं।
शिक्षकों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
वेबिनार के सफल आयोजन में महाविद्यालय के डॉ. नीरज असवाल, श्री दिनेश ममगाईं और श्री शूरवीर ने तकनीकी सत्र के संचालन में सहयोग दिया। कार्यक्रम का संचालन समाजशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गुलनाज फातिमा ने किया।
इस अवसर पर डॉ. चंदा थपलियाल, डॉ. शैलेंद्र सिंह, डॉ. अंचला, डॉ. रवि, डॉ. भारती नौटियाल, डॉ. पूजा पालीवाल, डॉ. बिट्टू सिंह, श्री पैन्यूली, श्री गिरीश जोशी, श्री कुलदीप, श्री सुभाष सिंह, श्री महावीर, श्री गोपाल, श्री सतपाल, श्रीमती रुक्मणी, श्री तेग सिंह सहित अन्य शिक्षक एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय वेबिनार में विशेषज्ञों ने डिजिटल तकनीक के अवसरों और चुनौतियों पर विचार साझा करते हुए इस बात को रेखांकित किया कि तकनीकी विकास का वास्तविक लाभ तभी व्यापक होगा, जब समाज के सभी वर्गों को डिजिटल संसाधनों और अवसरों तक समान पहुंच मिल सकेगी।


