- मिशन कीवी से पहाड़ों में बागवानी को मिलेगी नई उड़ान, 800 किसान पहले से जुड़े; 2026-27 में 60 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि पर कीवी उत्पादन का लक्ष्य
चमोली, 15 अक्टूबर। उत्तराखंड के पहाड़ों में उत्पादित कीवी अब देश की राजधानी दिल्ली के बाजारों में अपनी पहचान बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। जनपद चमोली के बागवानों के लिए इसे एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। पहली बार चमोली से 200 कुंतल कीवी की खेप दिल्ली की प्रसिद्ध आजादपुर मंडी के लिए रवाना की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में उद्यानिकी को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए किए जा रहे प्रयासों के बीच यह पहल पहाड़ी किसानों को बड़े बाजारों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने विकास भवन परिसर से हरी झंडी दिखाकर कीवी की खेप को दिल्ली के लिए रवाना किया। इस पहल से चमोली के काश्तकारों को स्थानीय बाजारों से आगे निकलकर देश की प्रमुख फल एवं सब्जी मंडियों तक पहुंच बनाने का अवसर मिलेगा। साथ ही उनकी उपज के लिए नए खरीदार तलाशने और विपणन के बेहतर विकल्प विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
800 किसान कर रहे कीवी की खेती, 62 हेक्टेयर में फैला उत्पादन
चमोली जनपद में मिशन कीवी के तहत बागवानी को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में जिले के लगभग 800 काश्तकार करीब 62 हेक्टेयर भूमि पर कीवी का उत्पादन कर रहे हैं। इस वर्ष जनपद में 500 कुंतल से अधिक कीवी का उत्पादन हुआ है। अब तक उत्पादन बढ़ाने पर केंद्रित प्रयासों के साथ-साथ किसानों को उनकी उपज का बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
दिल्ली की आजादपुर मंडी तक कीवी की पहली खेप पहुंचाने की पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्थानीय किसानों को बड़े बाजारों से जुड़ने, अपनी उपज की मांग बढ़ाने और विपणन के नए अवसर तलाशने में मदद मिलने की उम्मीद है। पहाड़ी क्षेत्रों में फल उत्पादन की अपार संभावनाओं को देखते हुए कीवी को किसानों की आय बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण बागवानी फसल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
उत्पादन से लेकर पैकेजिंग तक किसानों को मिल रहा सहयोग
मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि उद्यान विभाग के माध्यम से कीवी उत्पादक किसानों को तकनीकी सहयोग और पैकेजिंग सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही उपज के विपणन में आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उनकी उपज को बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करना भी जरूरी है। उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने से किसानों को लाभकारी अवसर मिल सकते हैं। इसी उद्देश्य से जनपद में उद्यानिकी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और फल एवं फूलों की खेती के प्रति काश्तकारों का रुझान बढ़ाने के लिए काम किया जा रहा है।
60 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि पर कीवी उत्पादन का लक्ष्य
चमोली में कीवी उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए उद्यान विभाग ने वर्ष 2026-27 के लिए विस्तार की योजना तैयार की है। मुख्य उद्यान अधिकारी नितेंद्र सिंह के अनुसार, आगामी वित्तीय वर्ष में 60 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में कीवी की खेती का विस्तार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत लगभग 400 नए कृषकों को कीवी उत्पादन से जोड़ने की योजना है।
इस विस्तार से जनपद में कीवी की खेती का दायरा बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है। विभाग की ओर से कीवी की विभिन्न प्रजातियों को प्रोत्साहित करने की योजना भी बनाई गई है। इनमें हावर्डस, एलिसन, मॉन्टी, ब्रूनो, एबॉट और लिमोन एलिना सहित अन्य प्रजातियां शामिल हैं।
पहाड़ के किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार, बढ़ेंगी संभावनाएं
चमोली की कीवी का दिल्ली की आजादपुर मंडी तक पहुंचना जनपद की बागवानी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज के विपणन के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में नई संभावनाएं खुलेंगी। बड़े बाजारों से जुड़ाव बढ़ने पर किसानों को संभावित खरीदारों तक पहुंच बनाने और अपनी उपज के लिए बेहतर विपणन व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है।
मिशन कीवी के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने के साथ तकनीकी सहयोग, पैकेजिंग और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। यदि इन प्रयासों को निरंतर गति मिलती है, तो चमोली की कीवी भविष्य में पहाड़ी क्षेत्रों की प्रमुख व्यावसायिक फसलों में अपनी जगह बना सकती है। इससे किसानों की आजीविका को मजबूती मिलने के साथ जनपद में उद्यानिकी आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की संभावनाएं हैं।


