- डिग्री कॉलेजों के निर्माण में तेजी लाने पर जोर, मंडी परिषद की धीमी कार्यप्रणाली पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन नाराज; कक्षाओं और प्रयोगशालाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश
देहरादून। उत्तराखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में कम से कम एक ऐसा परीक्षा केंद्र विकसित करने की तैयारी है, जहां कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की प्रतियोगी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित प्रणाली (सीबीटी) के माध्यम से आयोजित की जा सकें। इससे अभ्यर्थियों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ ही प्रदेश में ऑनलाइन परीक्षा आयोजन की क्षमता भी बढ़ेगी। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में आयोजित व्यय वित्त समिति की बैठक के दौरान संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में आवश्यक संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए।
निर्माण कार्यों में देरी पर जताई नाराजगी
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित व्यय वित्त समिति की बैठक में विभिन्न विभागों के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई और आवश्यक सहमति प्रदान की गई। बैठक के दौरान उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत डिग्री कॉलेजों के निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई। इस दौरान कार्यदायी संस्था मंडी परिषद की ओर से विभिन्न विभागों के निर्माण कार्यों में धीमी प्रगति पर मुख्य सचिव ने नाराजगी व्यक्त की।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं। परियोजनाओं की प्रगति में तेजी लाने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत की जाए। साथ ही प्रत्येक निर्माण कार्य की समय-सीमा निर्धारित करते हुए नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि विकास कार्यों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।
पहले बनें कक्षाएं और प्रयोगशालाएं, चरणबद्ध तरीके से पूरे हों काम
मुख्य सचिव ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि डिग्री कॉलेजों में सबसे पहले कक्षाओं और प्रयोगशालाओं के निर्माण पर ध्यान दिया जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं समय पर उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उपलब्ध संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुरूप परियोजनाओं की प्राथमिकता तय की जाए। निर्माण कार्यों को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक चरण निर्धारित समय-सीमा के भीतर संपन्न हो। इससे अधूरे निर्माण कार्यों को जल्द पूरा करने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
डिग्री कॉलेजों के परीक्षा भवनों को बनाया जाएगा आधुनिक
बैठक में डिग्री कॉलेजों में परीक्षा भवनों के निर्माण को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि परीक्षा भवनों को इस तरह विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जाएं, जिससे वे कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं के आयोजन के अनुकूल बन सकें। इसके लिए आवश्यक तकनीकी सुविधाओं और आधारभूत ढांचे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक आधुनिक परीक्षा केंद्र विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाए। इन केंद्रों पर एसएससी और यूकेएसएसएससी की प्रतियोगी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित प्रणाली से आयोजित की जा सकेंगी। इससे परीक्षा आयोजन के लिए प्रदेश की क्षमता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों को आधुनिक परीक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
आईटीआई भवनों में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश
मुख्य सचिव ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के भवनों के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सुविधाओं पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि आईटीआई भवनों में सभी आवश्यक आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को गुणवत्तापरक शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण का बेहतर वातावरण मिल सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य केवल भवन तैयार करने तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनमें विद्यार्थियों और प्रशिक्षुओं की जरूरतों के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध होनी चाहिए। इसके लिए विभागों को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता और उपयोगिता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
व्यय वित्त समिति की बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, एडीजीपी कारागार अभिनव कुमार, सचिव श्रीधर बाबू अद्दांकी, सी. रविशंकर, डॉ. रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव मनुज गोयल और नरेंद्र सिंह भंडारी सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


