- राज्य का बजट चार हजार करोड़ से बढ़कर 1.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा, करीब 35 हजार युवाओं को मिली सरकारी नौकरी; कुंभ-2027 की तैयारियों पर भी रखी सरकार की प्राथमिकताएं
हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को हल्द्वानी में दैनिक जागरण की ओर से आयोजित ‘जागरण विमर्श-उत्तराखंड : आशाएं और चुनौतियां’ कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की विकास यात्रा, उपलब्धियों, भविष्य की संभावनाओं और सामने खड़ी चुनौतियों पर विस्तार से विचार रखे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और समय के साथ उसकी जरूरतें तथा चुनौतियां भी बदलती रहती हैं। राज्य गठन के समय करीब चार हजार करोड़ रुपये से शुरू हुआ प्रदेश का बजट आज लगभग 1.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, ऊर्जा, कृषि और उद्यानिकी समेत विभिन्न क्षेत्रों में राज्य ने प्रगति की है।
पर्यटन और स्थानीय उत्पादों को मिल रही नई पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड तेजी से प्रमुख पर्यटन और फिल्म डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में होम-स्टे की संख्या में करीब 50 प्रतिशत वृद्धि हुई है। वहीं प्रति व्यक्ति आय में भी लगभग 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में उत्तराखंड और केरल संयुक्त रूप से प्रथम स्थान पर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को बाजार और नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं सीमित संसाधनों में बेहतर गुणवत्ता के उत्पाद तैयार कर रही हैं। महिला समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पांच लाख रुपये तक के ब्याजमुक्त ऋण की व्यवस्था की गई है।
युवाओं के लिए रोजगार और पारदर्शी भर्ती पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को पारदर्शी व्यवस्था के तहत रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उन्होंने बताया कि अनियमितताओं के मामलों में 100 से अधिक लोगों के विरुद्ध गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है, जबकि पिछले कुछ वर्षों में करीब 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति मिली है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को सरकारी नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार, स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कुंभ-2027 को लेकर तैयारियों पर मंथन
हरिद्वार कुंभ मेला-2027 का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संत समाज, अखाड़ों, धार्मिक संगठनों और अन्य हितधारकों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें और कुंभ का आयोजन सुरक्षित, सुव्यवस्थित, भव्य एवं दिव्य रूप से संपन्न हो।
हिमालय की संवेदनशीलता के साथ विकास जरूरी
मुख्यमंत्री ने अनियोजित विकास और जलवायु परिवर्तन को उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इकोलॉजी और इकॉनमी को एक-दूसरे का पूरक बनाकर आगे बढ़ना होगा। हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए विभिन्न क्षेत्रों की धारण क्षमता का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है। ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक निगरानी एवं सर्वेक्षण को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब बड़ी परियोजनाओं के साथ उसका लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। विकास की इस यात्रा में उत्तराखंड की संस्कृति, पहचान और देवभूमि की विशिष्टता का संरक्षण भी जरूरी है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, सांसद अजय भट्ट, विधायक बंशीधर भगत, सुरेश गड़िया, शिव अरोरा एवं प्रताप बिष्ट, महापौर हल्द्वानी-काठगोदाम गजराज सिंह बिष्ट, महापौर काशीपुर दीपक बाली समेत दैनिक जागरण के वरिष्ठ पदाधिकारी और प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे।


