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कौन हैं सुनील सजवाण? जानिए उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, पत्रकारिता और मंच संचालन के इस सशक्त हस्ताक्षर की प्रेरणादायक कहानी

Pahad Vaarta
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  • खेड़ा गांव के किसान परिवार से निकलकर बने प्रदेश के चर्चित मंच संचालक, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता; लोकभाषाओं के संरक्षण को बनाया जीवन का मिशन

रिपोर्ट -मोनिका रावत 

थत्यूड़ (टिहरी गढ़वाल)। देवभूमि उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और क्षेत्रीय भाषाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लेकर पिछले 22 वर्षों से निरंतर कार्य कर रहे सुनील सजवाण आज प्रदेश के प्रतिष्ठित मंच संचालकों में शुमार हैं। टिहरी गढ़वाल जनपद की ग्राम सभा खेड़ा में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे सुनील सजवाण ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और समर्पण के दम पर एक अलग पहचान बनाई है।

 

किसान शेर सिंह सजवाण एवं चन्द्रकला सजवाण के ज्येष्ठ पुत्र सुनील सजवाण का बचपन ग्रामीण परिवेश में बीता। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया। विद्यालयी जीवन से ही मंचीय गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और नाटकों में उनकी विशेष रुचि रही। यही रुचि आगे चलकर उनके सफल मंचीय जीवन की मजबूत नींव बनी।

 

आज सुनील सजवाण उत्तराखण्ड के लोकप्रिय मंच संचालक, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और लोक संस्कृति के समर्पित संवाहक के रूप में पहचान रखते हैं। उनकी मंच संचालन शैली, प्रभावशाली संवाद क्षमता और लोक परंपराओं से गहरा जुड़ाव उन्हें अन्य मंच संचालकों से अलग पहचान दिलाता है।

 

सुनील सजवाण की विशेषता यह है कि वे सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक, शैक्षिक एवं शासकीय कार्यक्रमों का संचालन स्थानीय बोली-भाषाओं में करना पसंद करते हैं। उनका मानना है कि किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसकी भाषा और संस्कृति में निहित होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने मंच संचालन को केवल एक पेशा नहीं, बल्कि लोकभाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का प्रभावी माध्यम बनाया है।

 

पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी उन्होंने जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। समाज में जागरूकता, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सरोकारों को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका सराहनीय रही है। लोक संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शासकीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।

 

सरल, सौम्य और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी सुनील सजवाण हर वर्ग के लोगों के साथ सहज संवाद स्थापित करने की क्षमता रखते हैं। यही गुण उन्हें मंच के साथ-साथ सामाजिक जीवन में भी लोकप्रिय बनाता है।

 

उनका लक्ष्य युवा पीढ़ी को अपनी मातृभाषा, संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना है, ताकि आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों से जुड़ाव बना रहे।

 

“संस्कृति का संरक्षण, भाषा का संवर्धन और सार्थक संवाद के माध्यम से समाज को जोड़ना” — यही सुनील सजवाण के जीवन का मूल मंत्र और ध्येय है।

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