- मुख्यमंत्री धामी और केंद्रीय मंत्री शेखावत हुए शामिल, शताब्दी समारोह को बताया युग चेतना का प्रवाह
हरिद्वार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘ध्वज वंदन समारोह’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर शताब्दी समारोह को भारतीय संस्कृति, साधना और संस्कारों के नवजागरण का प्रतीक बताया गया।
माता भगवती देवी शर्मा का जीवन राष्ट्र के लिए प्रेरणा: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह शताब्दी समारोह वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के तपस्वी जीवन, निःस्वार्थ सेवा और अखंड साधना के प्रति राष्ट्र की भावात्मक कृतज्ञता है। उन्होंने कहा कि माताजी का संपूर्ण जीवन त्याग, बलिदान और साधना की वह ज्योति है, जिसने असंख्य जीवनों को सही दिशा प्रदान की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गायत्री परिवार को किसी एक संगठन की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। यह युग चेतना का वह सतत प्रवाह है, जो व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र के उत्थान की दिशा में कार्य करता है।
चारधाम और आदि कैलाश भारत की आत्मा की धड़कन
मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक चेतना का उल्लेख करते हुए कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ और आदि कैलाश जैसे तीर्थस्थल भारत की आत्मा की धड़कन हैं। ऐसे पावन वातावरण में आयोजित यह शताब्दी समारोह भारतीय संस्कृति और साधना परंपरा के पुनर्जागरण का संदेश देता है।
देवभूमि के मूल स्वरूप की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है सरकार
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड के मूल स्वरूप को संरक्षित रखने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की गई है, सख्त दंगारोधी और धर्मांतरण विरोधी कानून बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक राज्य में 10 हजार एकड़ से अधिक अवैध अतिक्रमण हटाया जा चुका है।
सामूहिक चरित्र निर्माण से ही सशक्त सभ्यता का निर्माण: शेखावत
केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सेवा, साधना और संस्कार के त्रिवेणी संगम के रूप में यह शताब्दी समारोह नवयुग निर्माण में मील का पत्थर सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि विश्व की महान सभ्यताओं का निर्माण सामूहिक चरित्र निर्माण से ही संभव हुआ है।
जब समाज के व्यक्ति नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सेवा भाव को अपनाते हैं, तभी स्थायी संस्कृति और सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है। जनशताब्दी समारोह इसी चेतना को जाग्रत करने का प्रयास है।
यह आयोजन आत्मखोज और समाज परिवर्तन का अवसर: डॉ. चिन्मय पण्ड्या
शताब्दी समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यह समारोह किसी एकांत वैराग्य का आयोजन नहीं, बल्कि युगऋषि पूज्य आचार्यश्री का ‘खोया-पाया विभाग’ है, जहां व्यक्ति स्वयं को और अपने सामाजिक दायित्व को पुनः खोजता है।
उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य किसी के द्वार पर खड़ा होकर प्रतीक्षा नहीं करता, बल्कि यह आयोजन स्वयं सौभाग्य का द्वार खोलने का अवसर प्रदान करता है।
“कुछ हम बदलें, कुछ तुम बदलो, तभी यह ज़माना बदलेगा”
डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने समाज परिवर्तन का संदेश देते हुए कहा—
“गंगा की कसम, यमुना की कसम, यह ताना-बाना बदलेगा।
कुछ हम बदलें, कुछ तुम बदलो, तभी यह ज़माना बदलेगा।”
उन्होंने कहा कि आत्मपरिवर्तन ही सामाजिक और राष्ट्रीय परिवर्तन की पहली शर्त है।
विशिष्ट अतिथियों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान न्यायाधीश परविन्दर सिंह, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, स्वामी सम्पूर्णानंद जी, स्वामी वेलु बापू जी, के. नारायण राव, रमेश भट्ट, दिनेश काण्डपाल, आचार्य डॉ. दयाशंकर विद्यालंकार सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों को शांतिकुंज का प्रतीक चिह्न, गंगाजली, रुद्राक्ष माला और युग साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया।
वैरागी द्वीप पर लहराया शताब्दी ध्वज, नवसंकल्प का साक्षी बना कनखल
राजा दक्ष की नगरी कनखल स्थित वैरागी द्वीप की भूमि पर जब शताब्दी ध्वज लहराया, तो मानो एक युग ने अपने गौरवशाली अतीत को नमन करते हुए नवसंकल्प लिया।
अखिल विश्व गायत्री परिवार एवं शांतिकुंज के तत्वावधान में आयोजित गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी और अखंड दीपक के शताब्दी समारोह का शुभारंभ ध्वज वंदन के साथ श्रद्धामय वातावरण में हुआ। यह आयोजन 23 जनवरी तक चलेगा।
कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य रहे मौजूद
कार्यक्रम में विधायक हरिद्वार मदन कौशिक, दायित्वधारी श्यामवीर सैनी, देशराज कर्णवाल, शोभाराम प्रजापति, भाजपा जिला अध्यक्ष आशुतोष शर्मा, पूर्व विधायक संजय गुप्ता सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

