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APK फाइल के जाल में फंसाकर खाते से उड़ाए रुपये, टिहरी पुलिस ने 52 हजार वापस दिलाए

Pahad Vaarta
3 Min Read
  • Cyber Fraud: फर्जी APK डाउनलोड करते ही खाली हुआ खाता, टिहरी पुलिस की त्वरित कार्रवाई से पीड़ित को मिली राहत

नई टिहरी/मुनिकीरेती। साइबर ठगों द्वारा बिछाए गए डिजिटल जाल में फंसकर एक व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठा, लेकिन टिहरी पुलिस की तत्परता और साइबर टीम की तकनीकी दक्षता ने अपराधियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी गई रकम में से 52 हजार रुपये पीड़ित के खाते में वापस करा दिए।

जानकारी के अनुसार मुनिकीरेती क्षेत्र के ढालवाला निवासी ओमप्रकाश पुरवाल को साइबर अपराधियों ने एक फर्जी APK फाइल डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया। जैसे ही उक्त फाइल मोबाइल फोन में इंस्टॉल की गई, ठगों ने बैंकिंग संबंधी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बना ली और खाते से धनराशि निकाल ली।

ठगी का पता चलते ही पीड़ित ने पुलिस से संपर्क किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे के निर्देशन में साइबर सेल और मुनिकीरेती थाना पुलिस सक्रिय हो गई। टीम ने तत्काल तकनीकी जांच शुरू कर संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कराया तथा संबंधित बैंकिंग संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की।

पुलिस की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का परिणाम यह रहा कि ठगी गई राशि में से 52 हजार रुपये सफलतापूर्वक रिकवर कर पीड़ित के खाते में वापस जमा करा दिए गए।

राशि वापस मिलने पर पीड़ित ने टिहरी पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए पुलिस की सक्रियता और पेशेवर कार्यशैली की सराहना की।

पुलिस की अपील

टिहरी पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में APK फाइल डाउनलोड न करें। किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल, मैसेज या एप्लीकेशन के माध्यम से बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें।

यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी की घटना होती है तो तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें अथवा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

पुलिस का कहना है कि डिजिटल युग में जागरूकता और सतर्कता ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।

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