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उत्तराखंड

रणजीत सिंह वर्मा के संघर्ष की गाथा अब पुस्तक में, सीएम धामी ने किया विमोचन

Pahad Vaarta
Last updated: November 5, 2026 11:33 am
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  • उत्तराखंड राज्य आंदोलन के जननायक के योगदान को किया याद, बोले मुख्यमंत्री—आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड बनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी सेनानी एवं जननायक स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘रणजीत सिंह वर्मा : उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन की निर्णायक लड़ाई के एक जननायक’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय वर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पृथक उत्तराखंड राज्य के निर्माण में उनके योगदान को याद किया।

Contents
आंदोलनकारियों के संघर्ष से बना उत्तराखंडआंदोलनकारियों के लिए अपना घर तक खोलादो बार विधायक रहे, फिर भी राज्य निर्माण का संकल्प रहा सर्वोपरिआंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड बनाना लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने पुस्तक के माध्यम से राज्य आंदोलन के इतिहास और स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा के संघर्ष को संरक्षित करने के लिए वरिष्ठ साहित्यकार गंभीर सिंह पालनी और अजय वर्मा के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल एक जननायक की जीवनगाथा नहीं, बल्कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के संघर्ष, त्याग और संकल्प का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इससे आने वाली पीढ़ियों को राज्य निर्माण के इतिहास और आंदोलनकारियों के बलिदान को समझने का अवसर मिलेगा।

आंदोलनकारियों के संघर्ष से बना उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन दशकों के संघर्ष और असंख्य आंदोलनकारियों के त्याग एवं बलिदान का परिणाम है। पृथक राज्य की स्थापना जनता की आकांक्षाओं और जनभावनाओं की जीत थी। स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा ने पृथक उत्तराखंड की मांग को बुलंद करने, लोगों को एकजुट करने और आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड संयुक्त संघर्ष समिति के देहरादून जनपद अध्यक्ष के रूप में स्वर्गीय वर्मा ने विभिन्न संगठनों और आंदोलनकारियों को एक मंच पर लाकर आंदोलन को मजबूती प्रदान की। वर्ष 1995-96 और उसके बाद भी उन्होंने देहरादून में आंदोलन को सक्रिय बनाए रखा। बंद, चक्का जाम, जेल भरो और रेल रोको जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने पृथक राज्य की मांग को प्रभावी ढंग से उठाया।

आंदोलनकारियों के लिए अपना घर तक खोला

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा ने आंदोलन के दौरान डोईवाला के प्रेमनगर बाजार स्थित अपनी ससुराल को भी आंदोलनकारियों के सहयोग और ठहरने की व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बनाया। उनका योगदान केवल आंदोलन का नेतृत्व करने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने आंदोलनकारियों को हरसंभव सहयोग भी दिया।

मुख्यमंत्री ने खटीमा, मसूरी और मुजफ्फरनगर की घटनाओं को राज्य आंदोलन के इतिहास के पीड़ादायक अध्याय बताते हुए कहा कि अनेक कठिनाइयों और यातनाओं के बावजूद आंदोलनकारियों ने अपना संघर्ष जारी रखा। उनके त्याग और बलिदान का परिणाम रहा कि 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड देश के 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।

दो बार विधायक रहे, फिर भी राज्य निर्माण का संकल्प रहा सर्वोपरि

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा अविभाजित उत्तर प्रदेश की मसूरी विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे। इसके बावजूद उन्होंने राज्य निर्माण के संकल्प को सर्वोपरि रखा। राज्य गठन के बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे। उनका जीवन सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता और निःस्वार्थ जनसेवा की प्रेरणा देता है।

आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड बनाना लक्ष्य

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ ही उनके सपनों को साकार करना सभी की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार उत्तराखंड के समग्र विकास, सुशासन, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलें, मातृशक्ति आत्मनिर्भर बने और विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप विकसित और समृद्ध उत्तराखंड का निर्माण ही स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा सहित राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले सभी आंदोलनकारियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलन के शहीदों को नमन करते हुए सभी आंदोलनकारियों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, हंस फाउंडेशन की संस्थापक माता मंगला, वरिष्ठ साहित्यकार गंभीर सिंह पालनी, अजय वर्मा सहित राज्य आंदोलनकारी, जनप्रतिनिधि और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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